शनिवार, 4 जुलाई 2020

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ॐ 

Rudraksha रुदाक्ष 


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Om  

       Rudraksha 2020 


  रुद्राक्ष का महत्त्व बिना      शिवपुराण के अधूरा है।  


शिवपुराण में रुद्राक्ष के महत्तव के बारे में पूरी जानकारी है।  जो जानकारी शिवमहापुराण में लिखी है, वही मैं यहाँ आप सब के लिए भगवान शिव के आशीष से लिख रहा हूँ।  

         रुद्राक्ष एक ऐसा फल है, जो सदैव मानव कल्याण के लिए ही धरती पर है। रुद्राक्ष धारण करने वाला सदैव भगवान शिव का कृपापात्र हो जाता है।  रुद्राक्ष का ज्ञान अनमोल है, मानव जीवन में रुद्राक्ष का सदैव अपना महत्त्व  है।  
         रूद्राक्ष भगवान शिव को अति प्रिय है। रूद्राक्ष परम पावन कहा गया है।  रूद्राक्ष के दर्शन से तथा रूद्राक्ष की माला पर जप करने से समस्त पापों का हरण हो जाता है, रुद्राक्षधारी को भूत प्रेत कुछ नहीं कर सकते। रूद्रक्षधारी से भगवन प्रसन्न होते हैं। रुद्राक्ष मोक्ष का प्रदान करता है।  
         पूर्व कल में परमात्मा शिव ने समस्त लोगों का उपकार करने हेतु देवी माँ पार्वती को एक कथा में रुद्राक्ष की महिमा का वर्णन किया है।  भगवान शिव ने माँ पार्वती से कहा है पूर्व काल की बात है,  मैं हजारों वर्षों से एक घोर तप कर रहा था, एक दिन जब मैंने जैसे ही अपने नेत्रों को खोला उस समय नेत्रों से कुछ जल की बूंदे  धरती पर पड़ी और उन बूंदों से रूद्राक्ष नाम के वृक्ष धरती पर पैदा हो गए। 
         मैंने वो रूद्राक्ष विष्णु भक्तों को बाँट दिया, भूतल पर मथुरा, अयोध्या, लंका, काशी व अनेक जगहों पर रूद्राक्ष के अंग उगाए । शिव भक्तों को रूद्राक्ष जरूर धारण करना चाहिए। आँवले के आकार का रुद्राक्ष श्रेष्ठ श्रेणी में आता है।  बैर के फल के समान रूद्राक्ष मध्यम श्रेणी में आता है।  छोटा रूद्राक्ष का दाना जो चने के दाने के बराबर होता है। वह भी तीनों लोकों में उत्तम फल देने वाला तथा सौभाग्य प्रदान करता है।  
जो रुद्राक्ष आंवले  के फल के बराबर  होता है वह समस्त कष्टों का विनाश करने वाला होता है तथा जो गूंजा फल के समान बहुत छोटा होता है, वह भी सम्पूर्ण मनोरथों को पूर्ण करने वाला तथा सिद्धि देने वाला होता है।  छोटा रुद्राक्ष भी अधिक फलदायक है।   अत: रुद्राक्ष को अवश्य  धारण करना चाहिए, रुद्राक्ष मंगलकारी है, देखने में चिकने, मजबूत स्थूल कंटक युक्त, सुन्दर रुद्राक्ष, भोग और मोक्ष देनेवाले होते हैं।  जो रुद्राक्ष ख़राब हो, जैसे :- कीड़े लगे, टूटा हुआ, जिसमे दाने न हो, गोल न हो, वह रुद्राक्ष नहीं पहनना चाहिए।  जिस रुद्राक्ष में अपने आप ही डोरा पिरोने योग्य छेद हो गया हो वही उत्तम है।  
रुदाक्षधारी जातक को अपने खानपान में लहसुन, प्याज त्याग कर देना चाहिए।  
रुद्राक्ष प्रकार और धारण मंत्र :-
1 . एक मुखी रुदाक्ष 
मंत्र := ॐ ह्रीं नमः
साक्षात् भगवान शिव का रूप है, यह भोग और मोक्ष को देने वाला होता है, जहाँ एकमुखी रुद्राक्ष की पूजा होती है। वहाँ लक्ष्मी का स्थान सुनिश्चित रूप में होता है।  वहाँ सारे उपद्रव नष्ट हो जाते हैं, और सब की मनोकामना पूर्ण होती है।  
2. दोमुखी रुद्राक्ष
मंत्र := ॐ नमः 
दोमुखी रुद्राक्ष, देवेश्वर माना जाता है।  
यह सम्पूर्ण कामनाओं को पूर्ण करने वाला तथा पूर्ण फल प्रदान करने वाला होता है।  
3. तीनमुखी रुद्राक्ष 
मंत्र := ॐ क्लिं नमः 
साक्षात फल देने वाला है, ऐसा माना जाता है इस के प्रभाव से विद्या प्राप्ति में मदद मिलती है।  
4. चारमुखी रुद्राक्ष 
मंत्र := ॐ ह्रीं नमः 
चारमुखी रुद्राक्ष साक्षात ब्रह्मा का रूप माना जाता है।  
यह रुद्राक्ष धर्म, अर्थ, काम, और मोक्ष को पाने में मदद करता है।  
5. पाँचमुखी रुद्राक्ष
मंत्र: = ॐ ह्रीं नमः 
पाँचमुखी रुद्राक्ष, साक्षात् काल रूप है, सबको मुक्ति देने वाला, मनोरथ पूर्ण होते हैं।  
पाँचमुखी रुद्राक्ष समस्त पापों को दूर करने वाला माना जाता है।  
6. छ:मुखी रुद्राक्ष
मंत्र := ॐ ह्रीं हुं नमः 
छ:मुखी रुद्राक्ष धारण करने वाला जातक ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्त हो जाता है, 
यह रुद्राक्ष कार्तिक्य का स्वरूप माना जाता है।  
मंत्र := ॐ हुं नमः 
सातमुखी रुद्राक्ष धारण करने वाला ऐश्वर्यशाली  हो जाता है, लक्ष्मी इस जातक के साथ होती है।  यह प्रसिद्धि दिलाने में सहायक होता है।  
8. आठमुखी रुद्राक्ष:
मंत्र:= ॐ हुं नमः
आठमुखी रुद्राक्ष, भैरव रूप के समान है, पूर्ण आयु सहायक होता है।  
9. नौमुखी रुद्राक्ष
मंत्र := ॐ ह्रीं हुं नमः 
नौमुखी रुद्राक्ष धारण  वाला भैरव तथा कपिल मुनि का प्रतीक माना गया है।  
इस को धारण करने वालेको माँ माहेश्वरी का आशीष मिलता है।  
10. दसमुखी रुद्राक्ष
मंत्र := ॐ ह्रीं हुं नमः 
दसमुखी रुद्राक्ष को भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है तथा कामनाएँ पूर्ण होती हैं।  
11. ग्यारहमुखी रुद्राक्ष
मंत्र := ॐ ह्रीं हुं नमः 
ग्यारहमुखी रुद्राक्ष, सब जगह विजय मिलती है।  
यह रूद्र रूप माना गया है।  
12. बारहमुखी रुद्राक्ष 
मंत्र := ॐ क्रौं  क्ष्रौं  रौं नमः 
इस को धारण करने वाला सूर्य के समान तेजस्वी होता है।  
13. तेरहमुखी रुद्राक्ष
मंत्र := ॐ ह्रीं हुं नमः 
तेरहमुखी रुद्राक्ष देश-विदेश में भगवान शिव का स्वरूप माना जाता है।  
तेरहमुखी रुद्राक्ष धारण करने से सौभाग्य प्राप्त होता है।

14. चौदहमुखी रुद्राक्ष

मंत्र := ॐ नमः 
चौदहमुखी रुद्राक्ष परम स्वरूप है, माना जाता है यदि भक्तिपूर्वक इस को मस्तक पर धारण किया जाए तो पापों का नाश होता है।  

ॐ नमः शिवाय:  ॐ नमः शिवाय:ॐ नमः शिवाय:



त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् |

उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ||


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